विविधताओं से भरे प्रदेश राजस्थान के बारे में एक कहावत प्रचलित है कि कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी यानी यहां हर एक कोस पर इस प्रदेश मंे पानी का स्वाद बदल जाता है और चार कोस की दूरी पर भाषा और वेशभूषा बदल जाती है। एेसे में इस रंग-बिरंगे प्रदेश, जिसे कहा ही रंगीला राजस्थान जाता है, उसे कौन नहीं देखना चाहेगा। यही कारण है कि देश ही नहीं, दुनियाभर से पर्यटक इस प्रदेश की ओर खिंचे चले आते हैं। राजस्थान में पर्यटन व्यवसाय हजारों करोड़ रुपए का है, लेकिन अभी तक पर्यटन के इस व्यवसाय से प्रदेश के गांव लगभग अछूते ही थे।
विश्व पर्यटन के मानचित्र पर राजस्थान की अलग पहचान है। विविधताओं से भरे इस प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर पाणी। भला ऐसे प्रदेश को कौन नहीं देखना चाहेगा।
वर्ष 2020 की शुरुआत में जब पूरे विश्व में कोरोना वायरस की प्रथम लहर ने मानव जीवन को झकझोर कर रख दिया था और असंख्य व्यक्तियों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। उस दौरान आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दो वक्त के भोजन के लिए भी संघर्ष करना पड़ा और जीवनयापन करना दूभर हो गया था। ऐसी विषम परिस्थितियों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के 213 शहरी क्षेत्रों में 358 रसोई के माध्यम से 20 अगस्त, 2020 से कोई भूखा न सोएके लक्ष्य से स्व. इन्दिरा गांधी के नाम पर इंदिरा रसोई योजना का शुभारम्भ किया। 18 सितम्बर, 2022 को जोधपुर से इंदिरा रसोई योजना के तहत 512 नवीन इंदिरा रसोइयों का शुभारम्भ किया गया। वर्तमान में 870 इंदिरा रसोई संचालित की जा रही है जिन्हें बजट घोषणा में बढाकर 1 हजार किया गया है।
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Dec 31, 2022