उत्तर भारत के पहले स्किन बैंक को पहला डोनर मिल गया। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में शुरु किए गए स्किन बैंक को अपने पहले डोनर के लिए छह महीने का इंतजार करना पड़ा।
उत्तर भारत के पहले स्किन बैंक को पहला डोनर मिल गया। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में शुरु किए गए स्किन बैंक को अपने पहले डोनर के लिए छह महीने का इंतजार करना पड़ा।
जयपुर। उत्तर भारत के पहले स्किन बैंक को पहला डोनर मिल गया। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में शुरु किए गए स्किन बैंक को अपने पहले डोनर के लिए छह महीने का इंतजार करना पड़ा। स्किन बैंक की पहली डोनर बनी शहर के वैशाली नगर की रहने वाली 50 वर्षीय अनिता गोयल। गोयल की मृत्यु के बाद उनके परिजनों की सहमति से अस्पताल को उनकी स्किन डोनेट की गई। अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के 5 चिकित्सकों की देखरेख में डोनेशन की प्रोसेस पूरी की गई और महिला की स्किन को बैंक में सुरक्षित रखा गया। उत्तर भारत के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में जयपुर के एसएमएस में यह पहला स्किन बैंक स्थापित किया गया है।
बेन डेड मरीज की स्किन को किया डोनेट
एसएमएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश जैन के मुताबिक डोनर अनीता को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद उनके परिजनों से समझाइश की गई, चिकित्सकों की समझाइश का असर हुआ और गोयल के परिजन स्किन डोनेट करने को सहमत हुए। एसएमएस अस्पताल में स्किन बैंक की शुरूआत इसी वर्ष जून 2022 में हुई थी। लेकिन स्किन बैंक को छह महीने डोनर के लिए करीब छह महीने का इंतजार करना पड़ा। यह प्रदेश का पहला कैडेवरिक स्किन डोनेशन हैं। इससे पहले स्किन के लिए राजस्थान में किसी ने भी कैडेवर डोनेशन नहीं किया था।
बर्न केस के मरीजों को मिलेगा वरदान
एसएमएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों के मुताबिक कोई अगर 40 से 50 प्रतिशत तक झुलस जाता है तो ऐसे में मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। क्योकि उसके शरीर से प्रोटीन लॉस और इलेक्ट्रोलाइट फ्लूड की कमी होने लगती है। जिसके कारण मरीज के शरीर में धीरे-धीरे संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है और इस संक्रमण के कारण अधिकतर मरीजों की जान चली जाती हैं। ऐसे में अब बैंक में मौजूद स्किन से ग्राफ्टिंग कर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
हर वर्ष भारत में करीब 6 से 7 मिलियन बर्न के केस
डॉ. राकेश जैन ने बताया कि कैडेवर डोनेशन की कमी की वजह से देश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की स्थिति काफी खराब है। जैन के मुताबिक देश में हर साल करीब 6 से 7 मिलियन बर्न के केस आते है। जिनमे से करीब डेढ़ लाख मरीज गंभीर झुलसे हुए होते हैं। जिनकी मौत का खतरा अधिक होता है। अगर गंभीर झुलसे मरीज के लिए कोई ब्रेन डेड के परिजन स्किन डोनेट करें तो मरीज को दर्द से राहत मिलने के साथ उसके संक्रमण को बढ़ने से रोका जाए तो उसकी मौत होने की संभावना भी काफी हद तक खत्म हो जाती हैं। स्किन लगाने से जैसे जैसे मरीज रिकवर होगा, शरीर में नई त्वचा बनना शुरू होगी। तो लगाई गई स्किन हट जाएगी और संक्रमण के बचाव से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
पांच साल तक प्रिजर्व रखी जा सकती है स्किन
एसएमएस अस्पताल में बर्न मरीजों के लिए स्किन बैंक स्थापित किया गया है. यहां अत्याधुनिक मशीनें मशीने लगाई गई हैं. इस स्किन बैंक की खासियत यह है कि यहां डोनेट की गई स्किन को तीन से पांच साल तक प्रिजर्व रखा जा सकता है. स्किन बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश जैन ने बताया कि एक व्यक्ति स्किन डोनेट करता है तो उससे चार से पांच लोगों की जान बचाई जा सकती है.
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