मुंबई। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं इन मामलों में करीब 6 हजार करोड़ रुपए बैंकों समेत विभिन्न कस्टमर्स ने गंवा दिए। हालांकि यह राशि एक साल पहले की तुलना में आधी से भी कम है।
मुंबई। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं इन मामलों में करीब 6 हजार करोड़ रुपए बैंकों समेत विभिन्न कस्टमर्स ने गंवा दिए। हालांकि यह राशि एक साल पहले की तुलना में आधी से भी कम है।
मुंबई। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं इन मामलों में करीब 6 हजार करोड़ रुपए बैंकों समेत विभिन्न कस्टमर्स ने गंवा दिए। हालांकि यह राशि एक साल पहले की तुलना में आधी से भी कम है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में 60,389 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से जुड़े 9,102 मामले सामने आए। वित्त वर्ष 2020-21 में ऐसे मामलों की संख्या 7,358 थी और इनमें 1.37 लाख करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई थी।
हालांकि उधारी गतिविधियों में धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट का रुख देखा गया। पिछले वित्त वर्ष में ऐसे मामले घटकर 1,112 थे, जिनमें 6,042 करोड़ रुपए की राशि शामिल थी। वित्त वर्ष 2020-21 में धोखाधड़ी के 1,477 मामलों में 14,973 करोड़ रुपए की मुद्रा को टारगेट किया गया था।
आरबीआई ने इस रिपोर्ट में कहा कि बैंक धोखाधड़ी की संख्या के संदर्भ में अब कार्ड या इंटरनेट से होने वाले लेन-देन पर ज्यादा जोर है। इसके अलावा नकदी में होने वाली धोखाधड़ी भी बढ़ रही है। इनमें एक लाख रुपए या अधिक राशि वाले धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।
इसके साथ ही आरबीआई ने कहा कि जमा बीमा एवं क्रेडिट गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) ने पिछले वित्त वर्ष में 8,516.6 करोड़ रुपए के दावों का निपटान किया। इसमें एक बड़ा हिस्सा अब बंद हो चुके पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के ग्राहकों का था।
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