दुनियाभर में औषधीय पौधों पर भयंकर खतरा मंडरा रहा है। पृथ्वी हर दो साल में एक संभावित औषधीय पौधा विलुप्त हो रहा है। साथ ही इनके विलुप्त होने की दर प्राकृतिक प्रक्रिया के मुकाबले 100 गुना तेज है। भारत में ‘लाल सूची’ में 387 पौधे शामिल हैं। गोवा में पणजी में आयोजित वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस (डब्ल्यूएसी) में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने इस खतरे से निपटने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ औषधीय पौधों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
पणजी। दुनियाभर में औषधीय पौधों पर भयंकर खतरा मंडरा रहा है। पृथ्वी हर दो साल में एक संभावित औषधीय पौधा विलुप्त होरहा है। साथ ही इनके विलुप्त होने की दर प्राकृतिक प्रक्रिया के मुकाबले 100 गुना तेज है। भारत में ‘लाल सूची’ में 387 पौधेशामिल हैं। गोवा में पणजी में आयोजित वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस (डब्ल्यूएसी) में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने इस खतरे से निपटने केलिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ औषधीय पौधों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
डब्ल्यूएसी के नौवें संस्करण और आरोग्य एक्सपो 2022 में ‘औषधीय पौधों के संरक्षण की जरूरतें’ विषय पर एक सत्र में वक्ताओं नेकहा कि भारत में 900 प्रमुख औषधीय पौधों के 10 प्रतिशत अभी ‘खतरे’ की श्रेणी में हैं।
स्टेट मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट्स बोर्ड, छत्तीसगढ़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने कहा किअंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) का अनुमान है कि दुनिया की संवहनी पौधों की तकरीबन 20,000-25,000 प्रजातियों में से करीब 10 प्रतिशत खतरे में हैं। राव ने कहा कि भारत में ‘लाल सूची’ में 387 पौधे शामिल हैंजबकि 77 प्रजातियां गंभीर खतरे में हैं और छह प्रजातियां ‘विलुप्त’ की श्रेणी में हैं।
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