अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक अस्पताल से निकलने वाले सीवेज के पानी से एकत्र किए गए नमूने में कई तरह की दवाओं को चकमा देने वाले एक ‘खतरनाक’ बैक्टीरिया के जीन के एक नए प्रकार का पता लगाया है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक अस्पताल से निकलने वाले सीवेज के पानी से एकत्र किए गए नमूने में कई तरह की दवाओं को चकमा देने वाले एक ‘खतरनाक’ बैक्टीरिया के जीन के एक नए प्रकार का पता लगाया है।
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक अस्पताल से निकलने वालेसीवेज के पानी से एकत्र किए गए नमूने में कई तरह की दवाओं को चकमा देने वाले एक ‘खतरनाक’ बैक्टीरिया के जीन के एक नएप्रकार का पता लगाया है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि एमसीआर-5.1 नामक इस जीन पर बैक्टीरिया रोधी दवा कोलिस्टिन का असर नहीं होता। इससे संकेतमिलता है कि दुनिया के इस हिस्से में बैक्टीरिया जनित एक संक्रमण फैलने की आशंका है। माइक्रोबियल ड्रग रेजिस्टेंस पत्रिका मेंप्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोलिस्टिन रोधी इस खतरनाक जीन के अस्तित्व को दर्शाने वाली भारत से यह पहली रिपोर्टहै।
एंटिबायोटिक दवाएं बेअसर
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित एएमयू की अंतर्विषयक जैव प्रौद्योगिकी इकाई के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि भारत में इस जीनकी खोज से देश में स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति संभावित खतरे से निपटने के लिए समय रहते चेतावनी दी जा सकती है।
शोध पत्र के मुख्य लेखक प्रोफेसर असद यू. खान ने कहा, इस जीन की खोज चिंता का विषय है क्योंकि इससे दुनिया के इस हिस्सेमें बैक्टीरिया जनित एक संक्रमण फैलने की आशंका है। खान के अलावा इस शोधपत्र को अबसर तलत और अमीना उस्मानी नेलिखा है। अध्ययन में कहा गया कि कोलिस्टिन का इस्तेमाल ऐसे कई बैक्टीरिया जनित संक्रमण के विरुद्ध किया जाता है, जिन परबहुत सी दवाओं का असर नहीं होता।
सीवेज के पानी के लिए थे नमूने
शोध पत्र में कहा गया है कि कोलिस्टिन रोधी जीन का सामने आना इसलिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि इससे अंतिम एंटी बायोटिकदवा की विफलता का संकेत मिलता है। अनुसंधानकर्ताओं ने मुर्शिदाबाद के डोमकल सुपर स्पेशलिटी और सब डिविजनलअस्पताल से निकलने वाले सीवेज के पानी के नमूने एकत्र किए थे। पिछले साल 21 मार्च को एकत्र किए गए नमूनों से प्राप्तडीएनए में एमसीआर-5.1 जीन का पता चला।
एक करोड़ लोग मर सकते हैं हर साल
शोधपत्र में लेखकों ने कहा, अस्पताल के वातावरण में एमसीआर का प्रसार बेहद खतरनाक है, जो स्वास्थ्य देखभालकर्मियों, रोगियों और आगंतुकों को उच्च जोखिम में डालता है । इससे बहु-दवा प्रतिरोधी जीवाणु संक्रमण का प्रकोप होसकता है। उन्होंने कहा, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के कारण वर्ष 2050 तक प्रति वर्ष एक करोड़ लोगों कीअनुमानित मृत्यु दर चौंकाने वाली है और यह भारत जैसे देश के लिए और अधिक खतरनाक हो जाती है, जिसे एएमआरके लिए हॉटस्पॉट में से एक माना जाता है।
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