जयपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गत मंगलवार को यहां राजभवन में नवनिर्मित संविधान पार्क का लोकार्पण किया। वे राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार जयपुर आई थी। यह आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा व जीवंत लोकतंत्र है। हमारे इस महान लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है।
राष्ट्रपति ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि संविधान को मानने वाले लोग खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा। दूसरी तरफ अगर संविधान को मानने वाले लोग अच्छे हुए तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा
जयपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गत मंगलवार को यहां राजभवन में नवनिर्मित संविधान पार्क का लोकार्पण किया। वे राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार जयपुर आई थी। यह आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा व जीवंत लोकतंत्र है। हमारे इस महान लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है।
राष्ट्रपति ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि संविधान को मानने वाले लोग खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा। दूसरी तरफ अगर संविधान को मानने वाले लोग अच्छे हुए तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा । इससे पहले जयपुर हवाई अड्डा पहुंचने पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनकी अगवानी की। यहां से मुर्मू शहर में स्थित अमर जवान ज्योति पहुंचीं और वहां अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रपति ने संविधान की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने पत्र ‘यंग इंडिया’ में लिखा था कि मैं ऐसे भारत के लिए काम करूंगा, जिसमें गरीब से गरीब आदमी को भी लगे कि अपने देश को बनाने में मेरी बात भी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान पर आधारित हमारा लोकतंत्र बापू के उस विचार के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
संसद में महिला सांसदों की बढ़ती संख्या का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बहनें अपने संघर्ष तथा योग्यता के बल पर पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक अपनी उपस्थिति और योगदान को निरंतर बढ़ा रही हैं तथा समाज और देश की सेवा कर रही हैं। संविधान सभा में सरोजनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, मालती चौधरी, बेगम एजाज रसूल जैसी प्रतिनिधियों ने अहम सुझाव दिए थे। आज 100 से ज्यादा महिला सांसद हैं। लोकसभा में 83 और राज्यसभा में 33 महिला सांसद होना एक रिकॉर्ड है।
आमजन के लिए खोला जाएगा पार्क
राजभवन में बनाया गया संविधान पार्क आमजनता के लिए खोला जाएगा। राज्यपाल कलराज मिश्र ने संविधान पार्क के बारे में बताया कि संविधान उद्यान हमारे पवित्र संविधान के 22 भागों का ही कला रूप नहीं है बल्कि यह संविधान से जुड़े आदर्शों और संस्कृति का भी प्रतिबिम्ब है। उन्होंने कहा कि यहां भारतीय संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति बेहद कलात्मक ही नहीं, संस्कृति के आदर्श को प्रस्तुत करने वाली है। प्रस्तावना को सुनहरे बॉर्डर में मोहन जोदड़ो की सभ्यता के प्रतीक घोड़ा, हाथी, शेर और बैल के चित्रों से सज्जित किया गया है। उन्होंने कहा कि यहां महान कलाकार नंदलाल बोस और उनके शिष्यों के बनाये रेखांकनों को भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें शिष्यों के साथ यज्ञ करते वैदिक ऋषि का आश्रम, नटराज की मूर्ति, महाबलीपुरम मंदिर पर उकेरी कलाकृतियां, रेगिस्तान और गांधीजी की दांडी यात्रा, सुभाष बोस की आजाद हिन्द फौज, देवी-देवताओं, महात्मा बुद्ध आदि के रेखांकन प्रदर्शित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की गहराई में जाने के लिए सभ्यता से जुड़े संविधान के इन कलात्मक पक्षों के बारे में भी हरेक नागरिक को जानकारी होनी जरूरी है।
मयूर स्तम्भ बढ़ाएगा राजभवन का सौंदर्य
राज्यपाल ने कहा कि यहां संविधान निर्माण से जुड़ी ऐतिहासिक तस्वीरों और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान पुस्तक भेंट करते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की प्रतिमा भी खास आकर्षण का केन्द्र है। साथ ही, संविधान सभा के सदस्यों के नाम उकेरे गए हैं और संविधान एवं लोकतंत्र से जुड़े लोकनायकों की छवियां और मूर्तियां भी यहां प्रदर्शित की गई हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान का राजभवन मोरों की बहुतायत के लिए विशेष पहचान रखता है। इस दृष्टि से संविधान उद्यान के साथ ही बना मयूर स्तम्भ राजभवन के सौंदर्य को और बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि इसी तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चरखा कातते हुए प्रतिमा और शौर्य, वीरता एवं स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की अपने प्रिय घोड़े चेतक के साथ विश्राम करते हुए प्रतिमा भी यहां का विशेष आकर्षण है।
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