सर्दियों का यह सुहावना मौसम अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान गले में खराश, सर्दी-जुकाम, सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरत कर जाड़े के मौसम का आनंद लिया जा सकता है।
सर्दियों का यह सुहावना मौसम अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान गले में खराश, सर्दी-जुकाम, सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरत कर जाड़े के मौसम का आनंद लिया जा सकता है।
जयपुर। सर्दियों का यह सुहावना मौसम अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान गले मेंखराश, सर्दी-जुकाम, सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरत कर जाड़े के मौसम का आनंद लियाजा सकता है।
इस मौसम में खान-पान का खास ख्याल रखना भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई प्रकार की बीमारियां होनेका खतरा भी बराबर बना रहता है। अगर आप साबुत अनाज, दलिया आदि का सेवन करते हैं तो ये वजन कम करने में भी असरदार हैंऔर दिल के लिए भी फायदेमंद साबित होते हैं। इस मौसम में सब्जियों और फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए। फलों औरसब्जियों में मौजूद विटामिन और मिनरल्स सर्दियों में बीमारियों से लड़ने के लिए काफी असरदार साबित होते हैं। सर्दी के मौसम मेंफ्राइड और सैचुरेटेड फूड्स का उपयोग नहीं करना चाहिए।
डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर वाले बरतें सावधानी
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित मरीजों को इस मौसम में खास ध्यान देना जरूरी होता है। सर्दी में डायबिटीज के मरीजोंमें दिल और मस्तिष्क आघात का खतरा रहता है। जाड़े में रक्तचाप बढ़ना भी आम समस्या है। वहीं आयुर्वेद में भी बताया गया है किसर्दियों में किन-किन द्रव्यों का सेवन करना चाहिए व किन-किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, जिससे आदमी स्वस्थ बना रहें।
इस ऋतु में सामान्यत: गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए। स्नान करनें से पहले तैल की सारे शरीर पर (अभ्यग) मालिश, उबटन वसिर में तैल लगाना चाहिए। इस समय भूमिगत घर (अण्डरग्राउण्ड) में या वातानुकुलित उष्ण घरों में निवास करना चाहिए। इसमौसम में फर्श पर बैठनें के लिए आसन, दरी, गलीचा आदि का उपयोग करना चाहिए। सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़े, स्वेटर, कम्बल व रेशमी वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए। अनावश्यक शीतल हवा में बिना बचाव किए दुपहिया वाहनों पर भ्रमण नहीं करनाचाहिए।
क्या खाएं, क्या न खाएं
सर्दी के मौसम में शरीर में अग्नि की प्रबलता होती है। अत: मुश्किल से पचने योग्य आहार का सेवन भी किया जा सकता है। इनमेंनए चावल का भात, शाली चावल गुड़, गजक, उड़द के लड्डू, भैंस का दूध, दही, मलाई का सेवन किया जा सकता है। साथ हीकलाकन्द, मावे की मिठाई, सूखे मेवे काजू-बादाम, छुआरे, पिस्ता, मूंगफली से बने पदार्थ, चिकनाई से बनी चीजें, मांसाहारी लोगमांस आदि से बने पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
आयुर्वेदिक औषधियों मे चिकित्सक की सलाह उपरांत आसव-अवलेह ( च्यवनप्राश, अश्वगन्धावलेह, द्राक्षावलेह आदि) पाक- (कौंच-पाक, सालम-पाक, मुदग- पाक, अश्वगंधा-पाक, गौंद-पाक, गाजर-पाक) का सेवन करना चाहिए। मौसमके अनुसार मिलने वाली सभी सब्जियों, सूप व गर्म रबड़ी आदि का सेवन करना चाहिए, लेकिन इस समय वात-वर्धकआहार ( भंूगड़े, सत्तू) अन्न पान, तेज शीतल हवा का सेवन नहीं करना व अत्यधिक शीतल वस्तुओं (आइस्क्रीम, शीतलजल, ज्यूस, कोल्ड ड्रिंक) का सेवन नहीं करना चाहिए।
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