डायबिटीज (मधुमेह) भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत तेजी फैल रही है। दुनिया में डायबिटीज के सबसे अधिक रोगी भारत में होने के कारण भारत को तो डायबिटीज की राजधानी तक कहा जाने लगा है।
डायबिटीज (मधुमेह) भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत तेजी फैल रही है। दुनिया में डायबिटीज के सबसे अधिक रोगी भारत में होने के कारण भारत को तो डायबिटीज की राजधानी तक कहा जाने लगा है।
जयपुर। डायबिटीज (मधुमेह) भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत तेजी फैल रही है। दुनिया में डायबिटीज के सबसे अधिक रोगी भारत में होने के कारण भारत को तो डायबिटीज की राजधानी तक कहा जाने लगा है। डायबिटीज के मरीजों की संख्या के मामले में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। दुनिया में सर्वाधिक डायबिटीज के मरीज चीन में पाए जाते हैं, लेकिन यह भारत में भी बहुत तेजी से फैल रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया में हर छठा व्यक्ति जो डायबिटीज से पीड़ित है, वह भारतीय है। भारत में करीब सात करोड़ 70 लाख डायबिटीज के मरीज हैं।
इंसुलिन की कमी से बढ़ता है खतरा
डायबिटीज में मानव का अग्नाशय शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने वाले इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन या तो कम कर देता है या पूरी तरह बंद कर देता है। इससे मानव के रक्त में शुगर की मात्रा बढऩे लगती है, जिससे कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर कंट्रोल रखना जरूरी है।
वर्ष 2030 तक 64 करोड़ लोग हो जाएंगे शिकार
आईडीएफ डायबिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में करीब 537 मिलियन वयस्क व्यक्ति, जिनकी उम्र 20 से 79 वर्ष के बीच है, डायबिटीज से पीडि़त हैं। एक अनुमार के अनुसार यदि डायबिटीज के फैलने की रफ्तार यही रही तो वर्ष 2030 तक दुनिया मे डायबिटीज से पीडि़त लोगों की संख्या 643 मिलियन (64 करोड़ 30 लााख) और 2045 तक 783 मिलियन तक पहुंच सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर साल करीब 40 लाख डायबिटीज से पीडि़त लोगों की मौत हो जाती है। वर्ष 2021 में डायबिटीज से पूरी दुनिया में करीब 67 लाख लोगों की मौत हुई। दुनिया मे हर दसवां व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है। पूरी दुनिया में 23.2 करोड़ लोग तो ऐसे हैं, जिन्हें पता ही नहीं है कि वो डायबिटीज से पीडि़त हैं। आईडीएफ की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल 966 अरब डॉलर डायबिटीज के उपचार पर खर्च कर दिए जाते हैं। इस खर्च में पिछले 15 वर्षों में 316 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वर्ष 1980 में थे सिर्फ 108 मिलियन मरीज
दुनियाभर में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 1980 के दौरान दुनिया में 108 मिलियन मरीज डायबिटीज के थे, लेकिन 2014 में यह संख्या 422 मिलियन हो गई थी। इसके बाद से कम कमाई या मिडिल इनकम वाले देशों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल, डायबिटीज की वजह से शरीर के कई हिस्सों पर असर पड़ता है और कई बार ये मौत का कारण बनते हैं। वर्ष 2019 में 2 मिलियन यानी करीब 20 लाख लोगों की मौत का कारण डायबिटीज और किडनी था।
48 फीसदी मौतें 70 साल की उम्र से पहले
साल 2019 में डायबिटीज से सीधे 1.5 मिलियन लोगों की मौत हो गई थी और इसमें 48 फीसदी मौतें 70 साल की उम्र से पहले हुई थी। इसके अलावा 46 हजार लोगों की मौत डायबिटीज की वजह से हुई। किडनी की दिक्कत वजह से हुई और डायबिटीज की वजह से होने वाली सीने में दिक्कत की वजह से भी कई लोगों की मौत हो गई। डायबिटीज अक्सर अंधापन, किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक आदि का कारण बनता है।
12.1 मिलियन लोग 65 साल से कम के
डायबिटीज के मामले में भारत की स्थिति भी काफी भयावह है। डायबिटीज के मरीजों के मामले में भारत का दूसरा स्थान है। चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा डायबिटीज के मरीज है। अभी भारत में 77 मिलियन लोग डायबिटीज से परेशान हैं और इसमें 12.1 मिलियन लोग 65 साल से कम के हैं और माना जा रहा है कि 2045 तक ये आंकड़ा 27 मिलियन को पार कर जाएगा।
मरने वाले लोगों की संख्या की बात करें तो साल 2020 में 7 लाख ऐसे लोगों की मौत हुई है, जिनके डायबिटीज की वजह से किडनी, हाइपरग्लेसिमिया जैसे रोग हुए थे। भारत में पुरुष और महिलाओं में लगभग बराबर मरीज हैं और सबसे ज्यादा 70 साल से ज्यादा उम्र के लोग इससे परेशान हैं। कई सर्वे में सामने आया है कि भारत में मौत का 7वां कारण अब डायबिटीज बनता जा रहा है और हर साल करीब 9-10 लाख इसकी वजह से अपनी जान गवां रहे हैं।
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